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पहले बेरोजगार थे, अब कर्जदार हो गए
शहर को मिली ई-रिक्शा की सौगात अब वाहन मालिकों के लिए गले की हड्डी बन गई है। सिंहस्थ महापर्व से पहले जोरशोर से इन्हें सड़कों पर उतारा गया लेकिन सिंहस्थ के समापन के बाद से ही इनके वाहन मालिकों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस संकट के चलते अब ई-रिक्शा चालकों ने नया तरीका निकाला है और ई-रिक्शा में टू-व्हीलर का इंजन लगाकर इन्हें थ्री से फोर-व्हीलर बना दिया।शहर की सड़कों पर दौड़ती बैटरी चलित ई-रिक्शा को इस उद्देश्य से चलाया गया था कि इससे प्रदूषण कम होगा लेकिन अब यही वाहन मालिकों के लिए जी का जंजाल बन गई हैं। लोगों ने इसे अच्छी सौगात मानते से हुए बैंक से कर्ज लेकर ई-रिक्शा खरीदे लेकिन जिन कंपनियों के यह ई-रिक्शा थे वह कंपनियां इन्हें बेचने के बाद रफूचक्कर हो गईं।
गाडिय़ों में खराबी होने पर कंपनियों ने इन्हें दुरुस्त करने की गारंटी-वारंटी भी दी थी लेकिन कंपनी भागी तो सारे वादे धरे के धरे रह गए। इन गाडिय़ों में जो बैटरियां लगाई गई थीं वे भी घटिया कंपनी की थीं जो दो माह में ही खराब हो गई हैं। नई बैटरी की कीमत करीब २० हजार रुपए है। ऐसे में ई-रिक्शा के मालिकों के लिए इन्हें खरीदना बूते से बाहर है। ऐसे में बैंक की किश्त चुकाने का भी इनके सामने संकट खड़ा हो गया।